
हॉर्मोनल इम्बेलेंस की स्थिति तब आती है जब खून में हार्मोन्स के स्तर में ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ोतरी या गिरावट होती है। इससे शरीर पर काफी ज़्यादा प्रभाव पड़ते हैं जो की शरीर के लिए परेशानियों का कारण बन सकते हैं। हॉर्मोन्स हमारे शरीर को बहुत ज़्यादा प्रभावित करते हैं, और इनका एक सही मात्रा में शरीर में मौजूद होना काफी ज़रूरी होता है। हॉर्मोन्स के स्तर में छोटी सी भी उतार चढ़ाव से शरीर पर इसके प्रभाव साफ नज़र आने लगते हैं। उनमें से कुछ हैं-
1. भूख में कमी
2. हार्ट रेट में बाढ़ोतरी या गिरावट
3. मूड में बदलाव
4. शरीर के रंग में बदलाव
5. प्रजनन चक्र पर असर

हॉर्मोनल इम्बेलेंस कभी भी किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है,पर अच्छी बात यह है की शरीर अक्सर तुरंत ही हॉर्मोनल इम्बेलेंस होने पर प्रतिकृया दे देता है। अगर इसे सही वक़्त पर पहचान लिया गया तो आप भविष्य में होने वाले भयंकर बीमारीयों और विकारों से बच सकते हैं।
हॉर्मोनल इम्बेलेंस होने के सबसे प्रमुख वजहों में से एंडोक्राईन गलेंड्स का सही तरीके से काम न करना है। एंडोक्राईन गलेंड्स में ही हॉर्मोन्स मौजूद होते हैं और ये एंडोक्राईन गलेंड्स में ही बनते और निकलते हैं। कई दवाइयों के इस्तेमाल की वजह से ये ढंग से काम नहीं कर पाते हैं। कई ऐसी स्वास्थ्य समसायाएँ होती हैं जो इन्हें सही ढंग से काम नहीं करने देती है।
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